चांडिल। दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी में इन दिनों एक बाघ विचरण कर रहा है। जंगली जानवरों के साथ साथ पालतू जानवरों का शिकार कर रहा है। अपने आहार के लिए गाय, बैल व बछड़ों का शिकार कर रहा है। हालांकि, वन विभाग ने एतिहात के तौर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर रखे हैं। लेकिन जंगली बाघ पर नियंत्रण रखना किसके बस की बात है? बताया जा रहा है कि बीते तीन महीनों से एक बाघ दलमा पहाड़ के चारो ओर विचरण कर रहा है। बीते दिनों नीमडीह के तनकोचा में एक पालतू गाय को बाघ ने अपना शिकार बनाया था, जिसके बाद से ही ग्रामीण दहशत में है। वहीं, इस घटना के बाद से ही वन विभाग भी सक्रिय हुआ है। वन विभाग ने दलमा क्षेत्र में बाघ के होने की पुष्टि भी की है। वन विभाग के अनुसार यह बाघ बेतला टाइगर रिजर्व से आया है जो ज्यादा दिनों तक रहने वाला नहीं है। लेकिन दलमा की आवोहवा बाघ को अच्छा लगा है और पर्याप्त भोजन मिलने के कारण वह इस क्षेत्र में ही रह रहा है।
शिव मंदिर गौशाला के गाय, बैल व बछड़ों का किया शिकार
बताया जा रहा है कि दलमा शिव मंदिर के गौशाला में रहने वाले गाय, बैल व बछडों का बाघ ने शिकार कर रहा है। शिव मंदिर के आटा बाबा उर्फ अनादि ने बताया कि गौशाला में 60 से अधिक गाय, बैल व बछड़े थे, लेकिन वर्तमान समय में 15 से अधिक जानवर गायब हैं। उनका कहना है कि गायब हुए जानवरों का शिकार बाघ ने किया है। वहीं, वन विभाग का दावा है कि बाघ ने अबतक केवल एक बैल व एक गाय को ही खाया है।
बाघ के क्षेत्र को किया गया सील
दलमा रेंजर दिनेश चंद्रा ने बताया कि दलमा शिव मंदिर गौशाला के गाय व बैल दलमा के जंगलों में चरने जाते हैं इस दौरान बाघ ने अबतक एक बैल व एक गाय का शिकार किया है। उन्होंने बताया कि बाघ सभी क्षेत्रों में भ्रमण नहीं कर रहा है, वह विशेष क्षेत्रों में भ्रमण कर रहा है इसलिए पर्यटकों की सुरक्षा के लिए उन क्षेत्रों को सील कर दिया गया है। बाघ भ्रमण कर रहे क्षेत्रों में फिलहाल पर्यटकों को जाने की अनुमति नहीं है। दिनेश चंद्रा ने बताया कि बेतला टाइगर रिजर्व से आकर विगत तीन महीने से उक्त बाघ दलमा में है। बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए दलमा जंगल के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 40 कैमरे लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि बाघ द्वारा किसी भी मनुष्य अथवा पालतू जानवरों को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना दें।